दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण के खिलाफ हुए प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा है कि सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत करेगी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि बातचीत से पहले प्रदर्शनकारियों को अपनी मांगें स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से सरकार के सामने रखनी होंगी।
जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लेकर पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग थी कि सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ तय करने में जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को अधिक महत्व दिया जाए।
चिराग पासवान बोले- सरकार सुनेगी मांगें
चिराग पासवान ने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों को सुनने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी मांगों का स्पष्ट प्रस्ताव सरकार के सामने रखना होगा।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी पहले अपनी मांगों को व्यवस्थित तरीके से रखें, ताकि सरकार उन पर विचार कर सके।
अखिलेश यादव ने बीजेपी और सहयोगियों पर साधा निशाना
आरक्षण के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी और उसके सहयोगियों पर निशाना साधा है। शनिवार को उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और उसके सहयोगी समय-समय पर ‘समीक्षा’ और ‘सुधार’ जैसे अस्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल कर आरक्षण का विरोध करते हैं।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कभी ‘क्रीमीलेयर’ की बात की जाती है तो कभी आरक्षण त्यागने की सलाह दी जाती है। उनके मुताबिक, ये सभी आरक्षण के अधिकार को कमजोर करने की कोशिशों के अलग-अलग तरीके हैं।
अखिलेश यादव ने अपने बयान के अंत में कहा, “आरक्षण था, आरक्षण है, आरक्षण रहेगा।”
आरक्षण के मुद्दे पर बढ़ सकती है सियासी गर्मी
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और सरकार की बातचीत की पेशकश के बाद आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। एक तरफ प्रदर्शनकारी आरक्षण और सरकारी योजनाओं में आर्थिक स्थिति को अधिक महत्व देने की मांग कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के अधिकारों से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों का क्या प्रस्ताव सरकार के सामने रखते हैं और सरकार उस पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है।



