जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुर-कंवरपुरा गांव में जर्जर सरकारी स्कूल की इमारत के नवनिर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, स्कूल की नई इमारत का निर्माण 1 सितंबर से शुरू होगा। इसके लिए सरकार ने कुल 18 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है।स्वीकृत राशि में 6 लाख रुपये विधायक कोष से, जबकि 12 लाख रुपये डीएमएफटी से दिए जाएंगे। जर्जर स्कूल की इमारत को लेकर हाल ही में CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए थे। स्कूल के निरीक्षण के दौरान कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच विवाद भी हुआ था।
स्कूल निरीक्षण को लेकर हुआ था विवाद
स्कूल के निरीक्षण को लेकर 21 अगस्त को CJP कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच विवाद हो गया था। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष पुलिस थाने पहुंच गए। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई गई हैं।
अब स्कूल के नवनिर्माण के लिए राशि स्वीकृत होने के बाद CJP ने इसे अपने अभियान की बड़ी सफलता बताया है।
CJP ने बताया बड़ी जीत
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्कूल के नवनिर्माण की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे संगठन की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा, “कॉकरोच जनता पार्टी की बड़ी जीत। भैंसों के तबेले में चल रहे रामपुरा के स्कूल का नवनिर्माण होगा।”
रांका ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार यह काम पहले भी कर सकती थी और स्कूल के मुद्दे को लेकर हुए विवाद की जरूरत नहीं थी।
उन्होंने कहा, “भजनलाल जी को सिर्फ यह कहना चाहूंगा कि यह काम आप पहले भी कर सकते थे। कल जो हिंसा कराई गई, उसकी जरूरत नहीं थी।”
गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
स्कूल के नवनिर्माण की मंजूरी के बावजूद CJP ने अपना अभियान खत्म नहीं करने की बात कही है। आशुतोष रांका ने कहा कि 21 अगस्त को हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी होने तक संगठन पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने कहा, “जब तक कल हिंसा फैलाने वालों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। हम तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक राजस्थान के सभी सरकारी स्कूल ठीक नहीं हो जाते।”
सरकार की ओर से 18 लाख रुपये की मंजूरी के बाद अब रामपुर-कंवरपुरा के जर्जर स्कूल की जगह नई इमारत बनने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि, स्कूल विवाद को लेकर दर्ज क्रॉस एफआईआर और CJP की गिरफ्तारी की मांग के चलते इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक टकराव अभी जारी रहने के आसार हैं।



