नई दिल्ली: भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक लोगों की पहुंच बेहतर हुई है और स्वास्थ्य बीमा का दायरा भी बढ़ा है। इसके बावजूद मधुमेह, मोटापा और उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियां देश के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
हालिया आंकड़े संकेत देते हैं कि इन बीमारियों का समय रहते पता लगाना और उनकी रोकथाम पर ध्यान देना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। बदलती जीवनशैली, खानपान में बदलाव और शारीरिक गतिविधि की कमी को इसके प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।
पुरुषों और महिलाओं दोनों में बढ़ा मधुमेह
आंकड़ों के अनुसार, भारत में मधुमेह का प्रसार पुरुषों और महिलाओं दोनों में बढ़ा है। 2015-16 की तुलना में 2019-21 से 2022-24 के बीच पुरुषों में मधुमेह का स्तर करीब 15.6 फीसदी से बढ़कर 20.9 फीसदी हो गया।
इसी अवधि में महिलाओं में भी मधुमेह का प्रसार 13.5 फीसदी से बढ़कर 17.8 फीसदी तक पहुंच गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए यह बढ़ोतरी इसलिए चिंता का विषय है क्योंकि मधुमेह का संबंध खानपान, शारीरिक गतिविधि, वजन और जीवनशैली से भी जुड़ा हुआ है।
बढ़ते वजन और मोटापे ने भी बढ़ाई चिंता
मधुमेह के साथ भारत में अधिक वजन और मोटापे की समस्या भी बढ़ रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं में अधिक वजन और मोटापे का स्तर 24 फीसदी से बढ़कर 30.7 फीसदी हो गया। वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 22.9 फीसदी से बढ़कर 27.3 फीसदी बताया गया है।
वयस्क मोटापे की तुलना में चीन का स्तर कुछ मामलों में भारत से ज्यादा बताया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, चीन में वयस्क मोटापे का स्तर करीब 8.3 फीसदी, जबकि भारत में 7.3 फीसदी है।
हालांकि, भारत में मोटापे की बढ़ती प्रवृत्ति भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, अधिक वजन और मोटापा कई गैर-संचारी बीमारियों के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं।
उच्च रक्तचाप की स्थिति भी चिंता का विषय
उच्च रक्तचाप के आंकड़ों में भी पुरुषों और महिलाओं के बीच अलग-अलग रुझान दिखाई देते हैं।
भारत में पुरुषों में उच्च रक्तचाप का स्तर करीब 21.3 फीसदी से बढ़कर 22.1 फीसदी हुआ है। वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 24 फीसदी से घटकर 19.4 फीसदी रहा।
भारत की तुलना में चीन में मोटापा और उच्च रक्तचाप का बोझ कई मामलों में अधिक बताया गया है। इसके बावजूद भारत में बढ़ता मधुमेह और अधिक वजन भविष्य के लिए चिंता का कारण है।
इलाज से ज्यादा रोकथाम पर देना होगा जोर
भारत के सामने अब बड़ी चुनौती केवल मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि बीमारी को शुरुआती स्तर पर रोकना भी है।
नियमित स्वास्थ्य जांच, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की निगरानी, वजन को नियंत्रित रखना, संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना महत्वपूर्ण होगा।
WHO के मुताबिक, 2024 के अंत तक भारत में 1.7 करोड़ से अधिक उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मरीज उपचार प्राप्त कर रहे थे। हालांकि, मरीजों की लगातार निगरानी और इलाज को प्रभावी तरीके से जारी रखना अभी भी बड़ी चुनौती है।
बदलती जीवनशैली पर लगाम जरूरी
भारत और चीन दोनों ही गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते बोझ का सामना कर रहे हैं। चीन में कुछ बीमारियों का स्तर अधिक है, लेकिन भारत में मधुमेह और अधिक वजन की समस्या जिस गति से बढ़ रही है, वह भविष्य के लिए चेतावनी है।
ऐसे में बीमारी बढ़ने के बाद इलाज कराने के बजाय समय रहते जांच और रोकथाम पर ध्यान देना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। बेहतर खानपान, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के जरिए कई जोखिमों को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित किया जा सकता है।



