टेनिस की दुनिया में चेक रिपब्लिक की महिला खिलाड़ियों का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला है। 21 वर्षीय लिंडा नोस्कोवा ने शनिवार को खेले गए रोमांचक महिला एकल फाइनल में अपनी हमवतन कैरोलिना मुचोवा को हराकर विंबलडन 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया। सेंटर कोर्ट पर खेले गए मुकाबले में नोस्कोवा ने मुचोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से मात दी।
इस जीत के साथ नोस्कोवा ने पहली बार प्रतिष्ठित वीनस रोजवाटर डिश ट्रॉफी अपने नाम की। यह उनके करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब भी है।
चार साल में चेक रिपब्लिक की तीसरी महिला चैंपियन
नोस्कोवा की जीत ने विंबलडन में चेक रिपब्लिक के दबदबे को और मजबूत कर दिया है। पिछले चार वर्षों में वह विंबलडन महिला एकल खिताब जीतने वाली अपने देश की तीसरी खिलाड़ी बन गई हैं।
उनसे पहले मार्केटा वोंद्रोउसोवा ने 2023 और बारबोरा क्रेजीकोवा ने 2024 में विंबलडन का खिताब जीता था।
2011 के बाद सबसे युवा चेक विंबलडन चैंपियन
नौवीं वरीयता प्राप्त नोस्कोवा ने खिताब जीतने के साथ एक खास रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। 21 साल की उम्र में चैंपियन बनकर वह 2011 में पेट्रा क्विटोवा के खिताब जीतने के बाद सबसे कम उम्र की चेक महिला विंबलडन चैंपियन बन गई हैं।
हालांकि, फाइनल में जीत उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं रही। मुकाबले में एक समय नोस्कोवा बेहद मजबूत स्थिति में थीं, लेकिन दूसरे सेट में उनके खेल में अचानक गिरावट आई और मुचोवा ने शानदार वापसी कर मैच को निर्णायक सेट तक पहुंचा दिया।
5-2 की बढ़त के बाद गंवाए पांच मैच पॉइंट
फाइनल के पहले सेट में नोस्कोवा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इसे 6-2 से अपने नाम किया। दूसरे सेट में भी वह एक समय 5-2 से आगे थीं और उनके पास मैच खत्म करने के कई मौके थे।
लेकिन मुचोवा ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार गेम जीतकर नोस्कोवा पर दबाव बनाया और दूसरा सेट 7-5 से जीत लिया। इस दौरान नोस्कोवा ने कुल पांच मैच पॉइंट गंवाए।
मैच का यह दौर इतना रोमांचक रहा कि इसकी तुलना 1993 के उस विंबलडन फाइनल से भी की जाने लगी, जब चेक खिलाड़ी जाना नोवोत्ना ने स्टेफी ग्राफ के खिलाफ बढ़त गंवा दी थी।
निर्णायक सेट में नोस्कोवा ने दिखाया मानसिक मजबूती
दूसरे सेट में मैच पॉइंट गंवाने के बाद नोस्कोवा के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानसिक दबाव से उबरने की थी। तीसरे सेट में उन्होंने शानदार वापसी की और शुरुआत से ही अपने खेल पर पकड़ बनाए रखी।
नोस्कोवा ने निर्णायक सेट में 5-2 की बढ़त हासिल कर ली। मुचोवा ने एक बार फिर वापसी की कोशिश की, लेकिन इस बार नोस्कोवा ने कोई गलती नहीं की। उन्होंने तीसरा सेट 6-3 से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया।
इस जीत के साथ 21 वर्षीय नोस्कोवा ने न सिर्फ अपने करियर का सबसे बड़ा खिताब जीता, बल्कि विंबलडन के सेंटर कोर्ट पर चेक टेनिस की नई पीढ़ी की ताकत का भी शानदार प्रदर्शन किया।



