उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज होती नजर आ रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने रविवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक सपा मुख्यालय में दोपहर करीब 1 बजे हुई।
बैठक के बाद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बीजेपी और योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुलाकात में उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, आरक्षण और 69 हजार शिक्षक भर्ती समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
‘संविधान और आरक्षण के लिए BJP सबसे बड़ा खतरा’
अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद संजय सिंह ने बीजेपी पर आरक्षण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संविधान और आरक्षण के लिए बीजेपी सबसे बड़ा खतरा है और आरक्षण खत्म करने की कोशिशों को नाकाम करना होगा।
संजय सिंह ने 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी सरकार ने इस भर्ती में पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों का हक मारा है।
उन्होंने कहा कि इन अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी जाएगी।
संजय सिंह ने कहा, “ऐसे तमाम मुद्दों पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से विस्तारपूर्वक चर्चा हुई।”
शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव के साथ बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा से जुड़े फैसलों और भर्ती प्रक्रियाओं में सामाजिक न्याय के मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि इन मुद्दों को लेकर आम आदमी पार्टी आगे भी अपनी आवाज उठाती रहेगी।
2027 चुनाव से पहले AAP-SP गठबंधन की चर्चा
संजय सिंह और अखिलेश यादव की मुलाकात को यूपी की आगामी सियासत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों नेताओं की बैठक ने AAP और सपा के संभावित गठबंधन की अटकलों को भी हवा दे दी है।
दोनों दल कई मुद्दों पर बीजेपी और योगी सरकार के खिलाफ एक जैसी राजनीतिक लाइन लेते नजर आते हैं। हालांकि, रविवार की मुलाकात के बाद अभी तक दोनों पार्टियों की ओर से किसी चुनावी गठबंधन को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
ऐसे में अब सवाल यही है कि यह मुलाकात केवल आरक्षण, शिक्षा और 69 हजार शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों तक सीमित है या फिर 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए AAP और सपा के बीच किसी बड़े राजनीतिक समीकरण की शुरुआत हो रही है।



