भागलपुर: बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से लंबे समय तक विधायक रहे गोपाल मंडल के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा ने भागलपुर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले गोपाल मंडल के हालिया राजनीतिक संपर्कों को देखते हुए उनके अगले कदम को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। पहले उनके राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में जाने की चर्चा थी, लेकिन अब कांग्रेस के साथ उनकी राजनीतिक पारी आगे बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं।
राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात की चर्चा
जानकारी के मुताबिक, सांसद पप्पू यादव की पहल पर गोपाल मंडल ने दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद कांग्रेस के साथ आगे बढ़ने का फैसला लिए जाने की बात कही जा रही है।
इससे पहले गोपाल मंडल की RJD नेता तेजस्वी यादव से भी मुलाकात हुई थी। उस समय उनके RJD में जाने की अटकलें तेज हो गई थीं। बताया गया था कि गोपाल मंडल ने 2027 में RJD की सदस्यता लेने की बात कही थी। हालांकि, बाद में उनका राजनीतिक रुख बदलता नजर आया।
चार बार गोपालपुर से विधायक रहे
गोपाल मंडल गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2005 से 2020 तक लगातार चार बार विधायक रहे। लंबे समय तक क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उनका स्थानीय स्तर पर प्रभाव माना जाता है।
2025 के विधानसभा चुनाव में JDU ने उनका टिकट काट दिया था। इसके बाद गोपाल मंडल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। चुनाव के बाद JDU ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।
इसके बाद से ही उनके अगले राजनीतिक ठिकाने को लेकर चर्चा चल रही थी।
2029 में भागलपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं
गोपाल मंडल पहले ही 2029 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस के साथ उनकी नजदीकी को भविष्य की लोकसभा राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
हालांकि, कांग्रेस की ओर से उन्हें 2029 में भागलपुर से उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
भागलपुर में बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण
गोपाल मंडल का गोपालपुर क्षेत्र में लंबा राजनीतिक अनुभव और स्थानीय प्रभाव कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर वह कांग्रेस में औपचारिक रूप से शामिल होते हैं, तो इसका असर केवल गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहने की संभावना है।
भागलपुर जिले में कांग्रेस संगठन और विपक्षी गठबंधन की राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। अब निगाह इस बात पर है कि कांग्रेस गोपाल मंडल को पार्टी में किस भूमिका के साथ आगे बढ़ाती है और क्या भविष्य में उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए मैदान में उतारने की रणनीति बनती है।



