नई दिल्ली: अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 28 अरब डॉलर के सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला किया है। इस कदम से दोनों पड़ोसी देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनाव और बढ़ गया है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कनाडा भी अमेरिकी टैरिफ के बराबर जवाबी शुल्क लगाएगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच एक बार फिर ट्रेड वॉर तेज होने की आशंका है।
आखिर क्यों नहीं बनी अमेरिका-कनाडा में बात?
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता के दौरान कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। अमेरिका लंबे समय से कनाडा के डेयरी बाजार में ज्यादा पहुंच की मांग कर रहा था। कनाडा ने अपने स्थानीय किसानों के हितों का हवाला देते हुए इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
इसके अलावा ट्रंप प्रशासन कनाडाई स्टील और वाहनों को लेकर भी नई व्यापारिक शर्तें चाहता था। अमेरिका की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत कनाडा से आने वाले कुछ उत्पादों पर कोटा और अन्य प्रतिबंधों की मांग की गई थी।
कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए यह मुद्दा अहम है, क्योंकि उसकी स्टील और ऑटो इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है।
सीमा सुरक्षा भी बना बड़ा मुद्दा
व्यापार वार्ता के दौरान अमेरिका ने कनाडा की सीमा पर अवैध घुसपैठ और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर भी आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई।
अमेरिकी पक्ष का कहना था कि व्यापार समझौते में सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया जाना चाहिए। वहीं कनाडा ने अमेरिकी प्रशासन की नई मांगों और बातचीत के अंतिम चरण में किए गए बदलावों पर आपत्ति जताई।
कनाडा भी लगाएगा जवाबी टैरिफ
व्यापार वार्ता विफल होने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका की ओर से अंतिम समय में शर्तों में किए गए बदलाव अनुचित और कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह हैं।
कार्नी के मुताबिक, अमेरिका के नए टैरिफ का कनाडा भी उसी अनुपात में जवाब देगा। उन्होंने कहा कि कनाडा अपने कर्मचारियों और कारोबारों की सुरक्षा के लिए जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है।
इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ने की आशंका है।
किन सामानों पर पड़ेगा असर?
अमेरिकी टैरिफ का असर कनाडा से अमेरिका भेजे जाने वाले सामान के एक हिस्से पर पड़ेगा। इसमें रोजमर्रा और औद्योगिक इस्तेमाल की कई वस्तुएं शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, हॉकी स्टिक से लेकर कुछ मेडिकल उपकरणों तक पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि कुल द्विपक्षीय व्यापार की तुलना में टैरिफ के दायरे में आने वाले सामान का हिस्सा सीमित बताया जा रहा है।
अमेरिका-कनाडा के बीच कितना बड़ा है कारोबार?
अमेरिका और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से बेहद गहराई से जुड़ी हुई हैं। पिछले साल दोनों देशों के बीच करीब 880 अरब डॉलर के सामान और सेवाओं का लेनदेन हुआ था।
ऐसे में नए टैरिफ का असर केवल दोनों देशों के कारोबारियों तक सीमित रहने की बजाय सप्लाई चेन, उद्योग और उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश जवाबी टैरिफ के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे या फिर व्यापार वार्ता के जरिए इस विवाद को सुलझाने की कोशिश करेंगे।



