नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद स्थिति अब भी बेहद गंभीर बनी हुई है। चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक, तिब्बत में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 558 लोग अभी भी लापता हैं।
इस बीच चीन ने चेतावनी दी है कि हालिया भूस्खलन के बाद बनी एक बैरियर झील के टूटने का खतरा काफी ज्यादा है, जिससे निचले इलाकों में एक और बाढ़ आ सकती है। शुक्रवार तक इस झील में करीब 25 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था।
चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, यह झील छोछेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम पर बनी है। मलबे और चट्टानों के कारण नदी का रास्ता अवरुद्ध होने से यहां पानी जमा हुआ है।
अधिकारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी झील में पहुंच सकता है। इससे इसके किनारे टूटने और नीचे की ओर अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है। चीन ने इसे ‘हाई रिस्क’ वाली स्थिति बताया है।
बैरियर झील का मतलब ऐसे जलाशय से है, जो नदी के प्रवाह को मलबा, चट्टान या भूस्खलन रोक देता है और उसके पीछे पानी जमा होने लगता है। यदि यह प्राकृतिक बांध अचानक टूट जाता है तो जमा पानी बेहद तेज रफ्तार से नीचे की ओर बह सकता है।
झील में बढ़ते खतरे को देखते हुए चीनी बचाव दलों को कुछ समय के लिए सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया था। बाद में स्थिति को फिलहाल प्रबंधनीय मानते हुए बचाव अभियान फिर शुरू कर दिया गया।
उधर, नेपाल में भी अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और राहत-बचाव दलों को सतर्क रहने को कहा है। झील से पानी निकलने के बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने की सूचना सामने आई है, हालांकि नेपाल के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल पानी का बहाव हालिया विनाशकारी बाढ़ की तुलना में काफी कम है।
26 अगस्त को आई इस भीषण बाढ़ ने नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। नेपाल में शुक्रवार तक 469 लोगों की मौत और 977 लोगों के लापता होने की सूचना थी, जबकि तिब्बत में 5 मौतों और 558 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है।



