हरिद्वार में योग गुरु स्वामी रामदेव ने भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत से जुड़े विवाद पर बड़ा बयान दिया है। रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान बाबा रामदेव ने कंगना का नाम लिए बिना कहा कि देश के लोग उनके योगदान और काम के बारे में जानते हैं, इसलिए वह ऐसे लोगों पर टिप्पणी कर विवाद को और बढ़ाना नहीं चाहते।
बाबा रामदेव ने कहा, “इस देश के लोग जानते हैं कि स्वामी रामदेव कौन हैं और उनका क्या योगदान रहा है। इसलिए, मैं ऐसे ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। मैं विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता।”
दरअसल, पिछले दिनों कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बाबा रामदेव पर निशाना साधा था। इसके बाद दोनों से जुड़े बयानों को लेकर विवाद तेज हो गया था।
‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन
हरिद्वार में बाबा रामदेव ने ‘एक देश, एक चुनाव’ का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ देश में विकास की गति तेज हो सकती है।
उन्होंने कहा कि देश में लगातार चुनाव होते रहते हैं और हर कुछ महीनों में किसी न किसी राज्य में चुनाव की प्रक्रिया चलती रहती है। ऐसे में चुनावी गतिविधियों के कारण होने वाले व्यवधान को कम करने की जरूरत है।
रामदेव ने कहा कि लोकतंत्र को सड़क और संसद में हंगामा करके बंधक नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित से समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी इच्छा है कि भारत 2040 तक ही विकसित राष्ट्र बन जाए।
प्रदर्शन और हंगामे पर भी साधा निशाना
बाबा रामदेव ने शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और कृषि समेत कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सरकार इन क्षेत्रों में काम कर रही है और आगे भी काम जारी रहेगा।
विरोध प्रदर्शनों को लेकर उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को आंदोलनों में आगे नहीं करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पांच, सात और दस साल तक के बच्चों को भी प्रदर्शनों में शामिल कर रहे हैं और पुलिस थानों, एसपी तथा जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों के घेराव के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
रामदेव ने कहा कि यदि किसी नागरिक के साथ अन्याय हो रहा है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोग लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं, लेकिन नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे करना उचित नहीं है।
‘वंदे मातरम’ विवाद पर भी बोले रामदेव
वंदे मातरम को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर भी बाबा रामदेव ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत माता उनके लिए आस्था, ज्ञान, शक्ति और भक्ति का केंद्र हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग ‘वंदे मातरम’ में देवी-देवताओं, मठों या मंदिरों के संदर्भ को लेकर सवाल उठाते हैं, उन्हें संस्कृत और भारतीय संस्कृति को और गहराई से समझने की जरूरत है।
रामदेव ने कहा कि भारत माता उनके लिए ज्ञान, आस्था, मंदिर, पूजा, कर्तव्य, उद्देश्य और मंजिल का प्रतीक हैं। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के अर्थ और उसकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझने के लिए संस्कृत के अध्ययन पर भी जोर दिया।



