प्रयागराज। यौन शोषण और महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा के विरोध में इलाहाबाद में फ्रीडम मार्च का आयोजन किया गया। महिला छात्रावास गेट, लल्ला चुंगी से शुरू हुआ मार्च चंद्रशेखर आजाद प्रतिमा, कंपनी गार्डन तक पहुंचा। आयोजकों के मुताबिक मार्च में बड़ी संख्या में छात्राओं, छात्रों और नागरिक समाज के लोगों ने हिस्सा लिया।
फ्रीडम मार्च की संयोजक और शोध छात्रा सोनाली ने कहा कि हमेशा हाशिए पर रखी गई आधी आबादी अब अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर रही है। उन्होंने कहा कि मणिपुर से लेकर दिल्ली, बनारस, महाराष्ट्र, जयपुर और देश के अन्य हिस्सों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के विरोध में महिलाएं लगातार प्रतिरोध दर्ज करा रही हैं।
सोनाली ने कहा, “इलाहाबाद में भी आज यही प्रतिरोध दर्ज किया जा रहा है। यौन शोषण से आजादी और मर्दवाद के खिलाफ सड़कों को बार-बार भरा जाएगा।”

मार्च में शामिल कीर्ति ने कहा कि यह केवल एक दिन का मार्च नहीं, बल्कि महिलाओं की रोज की लड़ाई है। उन्होंने छात्रावासों में समय की पाबंदी और कक्षा में महिलाओं को घूरने जैसी स्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि इन अनुभवों से बार-बार यह एहसास कराया जाता है कि महिलाओं की आजादी की एक सीमा तय है। उन्होंने कहा कि वे इस सीमा को तोड़ने के लिए सड़क पर उतरी हैं और “बेखौफ आजाद होकर रहेंगे।”
वहीं साक्षी ने कहा कि मणिपुर की घटना को केवल एक राज्य तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं के शरीर को युद्ध और हिंसा की वस्तु की तरह देखने वाली मानसिकता के खिलाफ संघर्ष जरूरी है।
उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी स्वतंत्र पहचान और सम्मान के लिए सड़क पर उतरी हैं और इस नजरिए से आजादी हासिल करने के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।
फ्रीडम मार्च और इसके बाद आयोजित सभा का संचालन मार्च की संयोजक सोनाली ने किया। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के साथ नागरिक समाज से जुड़े लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की सुरक्षा, यौन शोषण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और समान स्वतंत्रता की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।



