प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच खनन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसमें जियोलॉजिकल रिसोर्स, यूरेनियम और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे महत्वपूर्ण संसाधन शामिल हैं। दोनों देशों के बीच हाल में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को तेजी से लागू करने और आगे की साझेदारी के लिए प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय के सचिव (वेस्ट) सिबी जॉर्ज ने बताया कि भारत और उज्बेकिस्तान माइनिंग और जियोलॉजिकल रिसोर्स के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक MoU पर सहमत हुए हैं। दोनों देश माइनिंग सेक्टर में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक कमीशन मैकेनिज्म बनाने पर भी चर्चा कर रहे हैं।
चीन के दबदबे के बीच भारत की नई रणनीति
क्रिटिकल मिनरल्स और यूरेनियम की वैश्विक सप्लाई चेन में चीन की मजबूत स्थिति को देखते हुए भारत-उज्बेकिस्तान की यह साझेदारी रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित और विविध बनाने की कोशिश कर रहा है। उज्बेकिस्तान के साथ सहयोग से भारत को मध्य एशिया में संसाधनों तक सीधी पहुंच बनाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इसे सीधे तौर पर चीन के एकाधिकार को खत्म करने वाला कदम कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन भारत के लिए यह अपनी महत्वपूर्ण खनिज जरूरतों के लिए वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम जरूर है।
MoU को जल्द लागू करने पर जोर
सिबी जॉर्ज ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच समझौते को जल्द लागू करने के लिए प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान पर चर्चा हुई है। इसका उद्देश्य MoU को केवल समझौते तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक परियोजनाओं और कारोबारी साझेदारियों में बदलना है।
उन्होंने कहा कि माइनिंग पर हुए MoU से यूरेनियम सप्लाई के साथ-साथ क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
खेती में भी बढ़ेगा सहयोग
भारत और उज्बेकिस्तान कृषि क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच बीज उत्पादन, ड्रिप सिंचाई, बागवानी और खारी जमीन में खेती जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।
भारत की कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और उज्बेकिस्तान के नेशनल सेंटर फॉर नॉलेज एंड इनोवेशन इन एग्रीकल्चर के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग जारी है।
भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को मिला ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बातचीत में दोनों देशों के संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ तक ले जाने पर सहमति बनी।
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।
मार्केट एक्सेस, कनेक्टिविटी, बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने के साथ-साथ कृषि, हेल्थकेयर और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की योजना है।
उज्बेकिस्तान में शुरू हुआ UPI
भारत के लिए इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण परिणाम उज्बेकिस्तान में UPI की शुरुआत है। सिबी जॉर्ज के मुताबिक, इससे भारतीय डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अंतरराष्ट्रीय विस्तार होगा और दोनों देशों के बीच डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा शिक्षा, संस्कृति और युवा आदान-प्रदान को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। उज्बेकिस्तान में मौजूद बौद्ध विरासत से जुड़े स्थलों के संरक्षण के लिए भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
भारतीयों के लिए 30 दिन की वीजा-फ्री सुविधा
उज्बेकिस्तान ने भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिनों तक की वीजा-फ्री सुविधा शुरू करने की घोषणा की है। राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने कहा कि इस फैसले से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क, पर्यटन और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
मिर्जियोयेव ने ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के दौरान यह घोषणा की। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने भारत को एक ‘भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार’ बताया।
व्यापार और कनेक्टिविटी पर भी फोकस
दोनों देशों के बीच व्यापार और संयुक्त उपक्रमों में भी तेजी देखी जा रही है। भारत और उज्बेकिस्तान अब कनेक्टिविटी, डिजिटल पेमेंट, ऊर्जा और खनिज संसाधनों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
यूरेनियम और क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग भारत के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा उपकरण और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के लिए इन संसाधनों की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
भारत-उज्बेकिस्तान की यह नई साझेदारी दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ भारत की सुरक्षित और विविधीकृत संसाधन सप्लाई चेन बनाने की कोशिशों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।



