भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी की 102वीं जयंती के अवसर पर जननायक कर्पूरी ठाकुर विचार मंच एवं शिक्षा रिसर्च फाउंडेशन द्वारा 24–25 जनवरी को प्रयागराज स्थित हिंदुस्तान अकादमी में एक अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और चिंतकों ने सहभागिता की।
कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन प्रातः 10 बजे भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. प्रमोद शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन की रूपरेखा और इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य एवं संसदीय अध्ययन समिति के सभापति सुरेन्द्र चौधरी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर का व्यक्तित्व समाज के लिए एक आदर्श है और वे आज भी सामाजिक न्याय की प्रेरणा हैं।
अकादमिक सत्र की अध्यक्षता राजेंद्र सिंह “रज्जू भैया” विश्वविद्यालय के डीन ऑफ आर्ट्स एवं प्रख्यात समाज कार्य विद्वान प्रोफेसर विवेक कुमार सिंह ने की। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर राजनीति में मूल्यों और सामाजिक न्याय के प्रतीक थे तथा कर्मयोगी के रूप में पूरे समाज के लिए आदर्श हैं।
सामाजिक चिंतक चन्द्र पाल सिंह ने कर्पूरी ठाकुर को “विचार” बताते हुए उन्हें अनुकरणीय व्यक्तित्व कहा। पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य अशोक विश्वकर्मा ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर किसी एक वर्ग के नहीं, बल्कि समग्र समाज के नेता थे। अंतिम सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर हर्ष कुमार ने की, जिन्होंने ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता पर बल दिया।
सम्मेलन में गुरु प्रसाद मदन, सरिता पाण्डेय, डॉ. मनीषा शर्मा सहित कई वक्ताओं ने कर्पूरी ठाकुर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विचार रखे। पांच सत्रों में आयोजित इस संगोष्ठी में अनेक शिक्षाविदों, समाज वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. प्रेम शर्मा यागिक एवं डॉ. सुनील ने किया।